राज्य स्तरीय NAQUIM कार्यशाला: वैज्ञानिक एक्विफर मैपिंग और सतत भूजल प्रबंधन पर जोर
State-Level NAQUIM Workshop
State-Level NAQUIM Workshop: राज्य स्तरीय कार्यशाला “नेशनल एक्विफर मैपिंग एंड मैनेजमेंट (NAQUIM) कार्यक्रम” का सफल आयोजन केंद्रीय भूजल बोर्ड, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार, चंडीगढ़ द्वारा दिनांक 18 मार्च 2026 को राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR), सेक्टर-26, चंडीगढ़ में किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री विजॉय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस), अध्यक्ष, PWRDA रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. गोपाल कृष्ण (वैज्ञानिक-ई, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की), डॉ. बृज लाल लकारिया (प्रमुख, ICAR-IISWC) तथा डॉ. सतबीर सिंह कादियान (ईआईसी, IWRD एवं सीईओ, HWRA, हरियाणा) उपस्थित रहे। अपने संबोधनों में सभी गणमान्य अतिथियों ने दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु वैज्ञानिक एक्विफर मैपिंग एवं सतत भूजल प्रबंधन के महत्व पर बल दिया।

अपने स्वागत भाषण में श्री निधिश वर्मा, क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय भूजल बोर्ड ने NAQUIM कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से एक्विफर की पहचान, भूजल संभाव्यता क्षेत्रों का निर्धारण तथा स्थान-विशिष्ट प्रबंधन योजनाओं का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हितधारकों की भागीदारी, उन्नत तकनीकों के उपयोग तथा डेटा एकीकरण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

इस कार्यशाला में लगभग 200 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सरकारी संगठनों से आए अभियंता, हाइड्रोजियोलॉजिस्ट, शोधार्थी एवं छात्र शामिल थे। यह कार्यशाला विशेषज्ञों एवं युवा पेशेवरों के बीच ज्ञान साझा करने एवं संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र से हुआ, जिसके पश्चात दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में एक्विफर मैपिंग, भूजल प्रबंधन रणनीतियां, भू-भौतिकीय अध्ययन तथा पंजाब, हरियाणा एवं चंडीगढ़ से संबंधित केस स्टडी प्रस्तुत की गईं। केंद्रीय भूजल बोर्ड, राज्य विभागों एवं अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों ने NAQUIM कार्यक्रम के क्रियान्वयन एवं उपलब्धियों पर अपने विचार साझा किए।

प्रतिभागियों ने भूजल से जुड़ी चुनौतियों, डेटा एकीकरण, तथा भूजल मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता विश्लेषण के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) पर सक्रिय चर्चा की। कार्यशाला में सतत भूजल प्रबंधन हेतु वैज्ञानिक, डेटा-आधारित एवं सहभागी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया, जिसमें सभी गणमान्य अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया।